निमोनिया क्या होता है? कारण, लक्षण और बचाव के उपाय
निमोनिया एक गंभीर फेफड़ों का संक्रमण है। इसमें फेफड़ों की सूजन और संक्रमण होता है। यह रोग बच्चों और बुजुर्गों में अधिक देखा जाता है। समय पर इलाज न होने पर यह जानलेवा भी साबित हो सकता है।
निमोनिया कैसे होता है?
निमोनिया बैक्टीरिया, वायरस या फंगस से हो सकता है। बैक्टीरियल निमोनिया सबसे सामान्य रूप है। वायरस से होने वाला निमोनिया अक्सर फ्लू के बाद होता है। कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले लोग जल्दी प्रभावित होते हैं।
निमोनिया के मुख्य कारण
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धूम्रपान और शराब का अत्यधिक सेवन
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अस्वस्थ जीवनशैली और पोषण की कमी
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प्रदूषण और धूल का अत्यधिक संपर्क
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सर्द मौसम और ठंडी हवा में ज्यादा समय बिताना
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लंबे समय तक बीमार रहना या पुरानी बीमारी
निमोनिया के लक्षण
निमोनिया की पहचान करना जरूरी है। इसके आम लक्षण इस प्रकार हैं:
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तेज बुखार और ठंड लगना
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सीने में दर्द और खिंचाव
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सांस लेने में कठिनाई
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तेज खांसी और बलगम
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भूख कम लगना और थकान
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बच्चों में सांस तेज चलना और सुस्ती
निमोनिया का निदान कैसे होता है?
डॉक्टर रोगी की जांच करके एक्स-रे और खून की रिपोर्ट सुझाते हैं। एक्स-रे से फेफड़ों की स्थिति साफ दिखती है। खून की जांच से संक्रमण का पता चलता है। कुछ मामलों में बलगम की जांच भी की जाती है।
निमोनिया का इलाज
निमोनिया के इलाज में दवाइयाँ और सही देखभाल जरूरी है।
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बैक्टीरियल निमोनिया में एंटीबायोटिक दी जाती हैं।
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वायरल निमोनिया में एंटीवायरल दवाएँ मदद करती हैं।
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मरीज को पर्याप्त आराम की सलाह दी जाती है।
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ज्यादा पानी और तरल पदार्थ पीना जरूरी है।
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गंभीर मामलों में अस्पताल में भर्ती करना पड़ सकता है।
निमोनिया से बचाव के उपाय
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संतुलित आहार लें और प्रतिरोधक क्षमता मजबूत करें।
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धूम्रपान और शराब से पूरी तरह बचें।
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भीड़भाड़ और प्रदूषित स्थानों पर मास्क पहनें।
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समय पर टीकाकरण कराएँ।
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हाथ धोने और साफ-सफाई पर ध्यान दें।
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सर्दियों में गर्म कपड़े पहनें और ठंडी हवा से बचें।
बच्चों और बुजुर्गों में निमोनिया
बच्चों और बुजुर्गों में यह रोग तेजी से फैलता है। उनकी प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है। ऐसे मरीजों को तुरंत डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए। विलंब करना खतरनाक हो सकता है
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